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15 August Speech
15 August Speech

15 august speech in hindi

15 August Speech

स्वतंत्रता दिवस में अब कुछ ही दिन शेष हैं। 15 अगस्त हमारे यंहा धूमधाम से मनाया जाता है।सभी लोग अति उत्साह के साथ इसको मनाते हैं। स्कूल, कॉलेज और बिभिन्न संस्थानों में इसके कार्यक्रम रखे जाते हैं।

 ऐसे में विद्यार्थियों के लिए 15 August Speech प्रतियोगिता का भी आयोजन होता जिसको ध्यान में रखते हुए स्वतंत्रता दिवस पर यह भाषण प्रस्तुत है।

15 August Speech

मंचासीन आदरणीय मुख्य अतिथि महोदय, सम्माननीय प्राचार्य जी एवं गुरुजन, अभिभावक एवं मेरे प्रिय सहपाठियों सभी को सादर प्रणाम।

साथ ही आप सभी को भारतीय स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाइयाँ।

आज इस पावन राष्ट्रीय पर्व पर अपने विचार व्यक्त करने का अवसर प्रदान करने के लिए,

मैं इस कार्यक्रम के संचालक महोदय का भी हार्दिक धन्यवाद करना चाहता हूँ।

आज भारत की आजादी के 73 साल पूरे हो गए और हम सब इस आजादी का उत्सव मनाने के लिए यहाँ एकत्र हुए हैं।

आज से ठीक 73 वर्ष पूर्व, हमें आजादी मिली थी। हमारे आजादी के संघर्ष की गाथा बहुत बड़ी है

जिसका वर्णन एक दिन में नहीं हो सकता है।

हर भारतीय के लिए स्वतंत्रता दिवस बहुत महत्व रखता है।

हिंदुस्तान पर आज से 73 वर्ष पूर्व हम पर अंग्रेजों का शासन था, वे व्यापार के बहाने भारत आए

और धीरे-धीरे सब कुछ अपने अधीन कर लिया और हमें अपना गुलाम बना लिया।

भारत को इन गुलामी की बेड़ियों को तोड़ने के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ा।

हमारे देश के वीर स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने प्राणों की आहुति देकर भारत को स्वतंत्र कराया।

आज देश को प्रत्यक्ष गुलामी की यातना से आजादी तो मिल गई,

लेकिन क्या हम आज भी मानसिक गुलामी में नहीं है

ये सोचने की बात है?

आज भी हम अपने देश की स्वदेशी वस्तुओं और वस्त्रों को नहीं अपना कर ,

उन्हीं आक्रांता विदेशियों की वस्तुओं और वस्त्रों पर आश्रित है।

आज सभी भारतवासियों को इस पवन पर्व पर यह प्रण लेने की आवश्यकता है कि वो आत्मनिर्भर बनेंगे

और स्वदेशी वस्तुओं का ही इस्तेमाल करेंगे।

हम सभी की सच्ची आजादी तभी सिद्ध होगी जब भारत का प्रत्येक नागरिक आत्मनिर्भर होगा

और यही हमारे देश के वीर स्वतंत्रता सेनानियों को भी सच्ची श्रद्धांजलि भी होगी।

जब देश का प्रत्येक नागरिक आत्मनिर्भर होगा तो स्वतः ही अपना देश महान और आत्मनिर्भर बन जाएगा।

भारत माता की जय।  जय हिन्द।

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लेखक

अविनाश त्रिपाठी

एम.फिल., नेट(NET), पीएचडी शोधार्थी

 

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