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MSME
MSME

MSME Full Form

एमएसएमइ (MSME)

MSME क्या है?

भारत सरकार द्वारा लागू सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (MSMED) अधिनियम, 2006 के अनुसार, 

MSME की परिभाषा में (Micro, Small and Medium Enterprises ) सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को शामिल किया गया है। 

इसकी की फुल फॉर्म  सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (Micro, Small and Medium Enterprises) है।

full form of MSME in English Micro, Small and Medium Enterprises है।

जिनको subsidies (सब्सिडी)  इत्यादि देने के लिए तीन वर्गों में विभाजित किया गया है जिनकी परिभाषा निम्नलिखित है।

सूक्ष्म उद्यम

प्लांट और मशीनरी या उपकरण में निवेश 1 करोड़ रुपये से न हो और वार्षिक कारोबार 5 करोड़ रुपये से अधिक नहीं हैं वो सूक्ष्म उद्यम (MSME) के अंतर्गत आतें हैं।

लघु उद्यम

प्लांट और मशीनरी या उपकरण में निवेश 10 करोड़ रुपये से न हो और वार्षिक कारोबार 50 करोड़ रुपये से अधिक नहीं हैं वो लघु उद्यम (MSME) के अंतर्गत आतें हैं।

मध्यम उद्यम

प्लांट और मशीनरी या उपकरण में निवेश 50 करोड़ रुपये से न हो और वार्षिक कारोबार 250 करोड़ रुपये से अधिक नहीं हैं

वो मध्यम उद्यम के अंतर्गत आतें हैं।

छोटे व्यवसाय और एमएसएमई (माइक्रो, स्माल एंड मेडियम इंटरप्राइजेज ) भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं

और भारत की बेरोजगारी के संकट को हल करने की कुंजी हो सकती है. 

भारत में MSME क्षेत्र 100 मिलियन से अधिक लोगों को रोजगार देता है

और 45 प्रतिशत निर्माण उत्पादन और देश के 40 प्रतिशत से अधिक निर्यात के लिए जिम्मेदार है।

संचालन को बनाए रखने और अंततः विस्तार करने के लिए,

छोटे व्यवसायों को बड़ी मात्रा में पूंजी के रूप में पर्याप्त धन की आवश्यकता होती है.

हालांकि, इस क्षेत्र को वर्किंग कैपिटल की कमी का सामना करना पड़ रहा है,

और सस्ती दरों में कैपिटल मिलना भी मुश्किल हो रहा हैं. 

सरकारी योजनाओं

का उद्योजक अपने छोटे व्यवसायों और एमएसएमई को निधि प्राप्त करने के लिए लाभ ले सकते हैं.

कुल मिलकर १२-३५ तरह की अलग अलग योजनाओंके साथ सरकार हर कार्य क्षेत्र में नए उद्योगिओंको प्रोत्साहन दे रही हैं. 

इसमें करगिरों के लिए प्रशिक्षण से लेके, मार्केटिंग और निर्यात भी शामिल हैं.

निचे इन योजनाओं की सूचि दी गयी हैं. 

अपनी जरूरतों के अनुसार उद्योजक योजनाओं का फायदा उठाये. इन योजनाओंके बारे में 

अधिक जानकारी हिंदी और इंग्लिश दोनों भाषाओँ में  https://my.msme.gov.in/mymsme/Scheme.aspx  इस वेब-साइट पर मौजूद हैं.

 हर स्कीम के निचे संपर्क करने केलिए एकनाम ईमेल अड्रेस और फ़ोन नंबर दिया गया हैं

आपके किसी भी तरह की शंका निरसन के लिए ये उपयुक्त हैं.

ये योजनाएं भारत के विभिन्न कोनों में कोलैटरल सिक्योरिटी लिए बिना बेहतर उपकरण

और योग्यता प्राप्त रोजगारों के लिए  के लिए रोजगार के अवसर प्रदान करने से लेकर हैं।

रोजगार के अवसर प्रदान करने वाली स्कीम 
क्र.सं. स्कीम का नाम
1 प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम और अन्य क्रेडिट सहायता स्कीम
1.1. प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी)
1.2. कार्यनिष्पादन और क्रेडिट रेटिंग स्कीम
1.3. सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए क्रेडिट गारंटी ट्रस्ट फंड (सीजीटीएसएमई)
1.4. ब्याज सब्सिडी पात्रता प्रमाणपत्र (आईएसईसी)
2 खादी , ग्राम और कयर उद्योगों का विकास
2.1. विज्ञान और प्रौद्योगिकी स्कीम 
2.2. बाजार संवर्धन एवं विकास स्कीम (एमपीडीए)
2.3. परम्परागत उद्योगों के पुनर्सजन के लिए पुनरूद्धारित निधि स्कीम (स्फूर्ति) योजना
2.4. कोइयार विकास योजना (सीवीवाई)
2.4.1. कयर उद्योग प्रौद्योगिकी उन्नयन स्कीम (सीआईटीयूएस)
2.4.2. कयर के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी (एस व टी)
2.4.3. कौशल उन्नयन और महिला कयर योजना (एमसीवाई)
2.4.4. निर्यात बाजार संवर्धन (ईएमपी)
2.4.5. घरेलू बाजार संवर्धन स्कीम (डीएमपी)
2.4.6. व्यापार और उद्योग से संबंधित कार्यात्मक सहायता सेवाएं (टीआईआरएफएसएस)
2.4.7. कल्याणकारी उपाय (प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना) (पीएमएसबीवाई)
3 प्रौद्योगिकी उन्नयन और गुणवत्ता प्रमाण
3.1. जेड प्रमाणन स्कीम में एमएसएमई को वित्तीय सहायता
3.2. नवप्रवर्तन (इनोवेशन), ग्रामीण उद्योग और उद्यमिता संवर्धन स्कीम (एस्पायर)
3.3. राष्ट्रीय विनिर्माण प्रतिस्पर्धी कार्यक्रम, (एमएनसीपी)
3.3.1. प्रौद्योगिकी उन्नयन के लिए क्रेडिट लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी
3.3.2. आईएसओ 9000/आईएसओ 14001 प्रमाणन प्रतिपूर्ति
3.3.3. एमएसएमई को विपणन सहायता मदद (बार कोड)
3.3.4. एमएसएमई के लिए लिन विनिर्माण प्रतिस्पर्धी
3.3.5. एमएसएमई को डिजाइन विशेषज्ञता के लिए डिजाइन क्लिनिक
3.3.6. एमएसएमई को प्रौद्योगिकी और गुणवत्ता उन्नयन सहायता
3.3.7. इनक्यूबेटरों के माध्यम से एसएमई की उद्यमशीलता और प्रबंधकीय विकास
3.3.8. क्यूएमएस और क्यूटीटी के माध्यम से प्रतिस्पर्धी बनने के लिए विनिर्माण क्षेत्र को सक्षम बनाना
3.3.9. बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) पर जागरूक्ता पैदा करना
4 विपणन संवर्धन स्कीम
4.1. अंतर्राष्ट्रीय सहयोग
4.2. विपणन सहायता स्कीम
4.3. प्रापण प्रोक्यूरमेंट और विपणन सहायता स्कीम (पी एंड एमएस)
5 उद्यमिता और कौशल विकास कार्यक्रम
5.1. प्रशिक्षण संस्थानों (एटीआई) को सहायता
6 अवसंरचना विकास कार्यक्रम
6.1. सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम क्लस्टर विकास (एमएसई-सीडीपी)
7 सर्वेक्षण, अधय्यन और नीतिगत अनुसंधान स्कीम
7.1. दिनांक 15.10.2018 से प्रभावी एस एस एंड पी आर स्कीम के संशोधन दिशानिर्देश (द्विभाषी)
8 राष्ट्रीय एससी- एसटी हब
7.1. राष्ट्रीय एससी –एसटी हब (अंग्रेजी डाउनलोड करें) & (हिन्दी डाउनलोड करें)

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